Saturday, September 17, 2011

भाजपा और काँग्रेस कह कर हमें डराना बंद करो ...

पता नहीं क्यूँ लोगों को भर रहे घावों को कुरेदने में मजा आता है । खासकर के कथित बुद्धीजीवियों और मिडिया को । आज सुबह से ही गोधरा-गोधरा मोदी-मोदी चिल्ला रहे हैं । उस भयावह समय को जिसे हम धीरे-धीरे भुलना चाहते हैं, पर हमें बार बार याद दिलाया जा रहा है । कुछ लोगों को लग सकता है कि मैं मोदी या भाजपा समर्थक हूँ ... ओ सोचें ... हमारे देश में हत्र किसी को वैचारिक अभिव्यक्ति और सोचने का अधिकार है ... मैं भी उसी का इस्तेमाल कर रहा हूँ । क्या मेरा ये प्रश्न वाजीब नहीं? जब कभी नरेन्द्र् मोदी समाचार बनते हैं, पूरे देश में राजनीतिक बवाल शुरू हो जाता है । हर कोई खुद को मुसलमान भाईयों का सबसे बडा कथित पैरोकार सिद्ध करने में लग जाता है । चाहे खुद के दामन में कितने भी दाग हों । 1984 जैसे कई दंगो की सूत्रधार काँग्रेस खुद को मुसलमान भाईयों की सबसे बडी पैरोकार व मसीहा कहने से नहीं थकती ... उसे अपने दिन नहीं आते और भाजपा को सांप्रदायिक और दंगावादी पार्टी कहती है ... आज जो हो रहा है उसपर राजनीति करने के बजाय ये राजनेता क्यूँ हमारे पूराने जख्मों को कुरेदते रहते हैं ... आज लालू भी बोल रहे हैं, शरद यादव भी बोल रहे हैं ... पर तब इन सबने क्या किया जब भागलपुर दंगा हुआ ...शासन में रहते इन लोगों ने उन्हें इंसाफ क्यूँ नहीं दिलाया ।

एक बार फिर कहूँगा कि हमारी लाशों और जख्मों पर राजनीति करना छोडो ... इस तरह से किसी का क्यूँ महिमा मंडन कर रहे हो किसी का कि वह कल फिर वह हिन्दूओं का मसीहा / नेता (तथाकथित) बन जाए ... उसे इतना प्रचार मत दो ... कुछ करना है तो रोज बढ रही महँगाई के लिए करो ... भाजपा और काँग्रेस कह कर हमें डराना बंद करो ...

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