उद्देश्य से जीने वाला सदा ही भटक जाता है और उद्देश्य से जीने वाले का जीवन बोझ बन जाता है।
क्योंकि उद्देश्य है कल और जीना है आज। इसलिए,व्यर्थ के तनाव न पालो, व्यर्थ के विवाद न सींचो।
भविष्य से वर्त्तमान न लिखो क्योंकि वह संभव नही है।
वर्तमान से ही भविष्य को निकालो। सहज ही वह चला आता है।
उसके लिए तुम्हे सिर्फ़ इतना करना है कि ख़ुद को कमजोर नही पड़ने देना है।
अपने को मजबूत बनाये रखना है, ख़ुद पर विश्वास रखना है और अपने आत्मविश्वास को बनाये रखना है।
तुम्हे आज में जीना है, आज में जियो। जीने के लिए आज पर्याप्त है।
न्यूमन ने कहा है: " I do not long for the distant scene। One step is enough for me.” (दूर के दृश्य की आकांछा नही मुझे, बस एक कदम ही काफी है।)
हाँ, मरने के लिए जरूर आज पर्याप्त नही है!
मृत्यु के लिए कल जरूरी है!
इसलिए, जो कल में जीते हैं वे जीते नही, बस मरते ही है।
जियो आज में -अभी में-पूर्णता से -समग्रता से।
दृढ़ता के साथ–आत्मा-विस्वास के साथ।
कल खुद ही अपनी चिंता कर लेगा और सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी।
Thursday, June 11, 2009
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baut hi achchhi bate kahi .aashawadi hai aap .achchha laga .swagat hai .
ReplyDelete"सफलता तुम्हारे कदम चूमेगी"
ReplyDeleteक्या यह भविष्य का आश्वासन नहीं है?
भई इससे भी पिंड छुडाइये।
ज़रूर मिलेगी सफलता
ReplyDeletewelcome to blog jagat & nice post
ReplyDeleteplese visit my blog
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आत्म विश्वास से भरपूर एक अच्छा आलेख।
ReplyDeleteपडित/संत-जो शास्त्रों के पीछे दौडता हैं, वह पंडित है। और जो सत्य के पीछे दौडता है, वह संत है। पंडित शास्त्रो के पीछे दौडता है। जबकि संत के पीछे शास्त्र दौडतें हैं। शास्त्र पढकर जो बोले वह पंडित और सत्य पाकर जो बोले वह संत हैं। पंडित जीभ से बोलता है, संत जीवन से बोलता हैं, जिसका जीवन बोलने लगे, वह जीवित भगवान है।
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